Saturday, April 30, 2016


एक दिन रुक्मणी ने भोजन के बाद,
श्री कृष्ण को दूध पीने को दिया।

दूध ज्यदा गरम होने के कारण
श्री कृष्ण के हृदय में लगा
उनके श्रीमुख से निकला-
" हे राधे ! "

सुनते ही रुक्मणी बोली-
प्रभु !
ऐसा क्या है राधा जी में,
जो आपकी हर साँस पर उनका ही नाम होता है ?

मैं भी तो आपसे अपार प्रेम करती हूँ...
फिर भी,
आप हमें नहीं पुकारते !!

श्री कृष्ण ने कहा -देवी !
आप कभी राधा से मिली हैं ?
और मंद मंद मुस्काने लगे...

अगले दिन रुक्मणी राधाजी से मिलने उनके महल में पहुंची ।

राधाजी के कक्ष के बाहर अत्यंत खूबसूरत स्त्री को देखा...
उनके मुख पर तेज होने कारण उसने सोचा कि-
ये ही राधाजी है और उनके चरण छुने लगी !

तभी वो बोली -आप कौन हैं ?

तब रुक्मणी ने अपना परिचय दिया और आने का कारण बताया...

तब वो बोली-
मैं तो राधा जी की दासी हूँ।

राधाजी तो सात द्वार के बाद आपको मिलेंगी !!

रुक्मणी ने सातो द्वार पार किये...
हर द्वार पर एक से एक सुन्दर और तेजवान दासी को देख सोच रही थी क़ि-
अगर उनकी दासियाँ इतनी रूपवान हैं...
राधारानी स्वयं कैसी होंगी ?

सोचते हुए राधाजी के कक्ष में पहुंची...

कक्ष में राधा जी को देखा-
अत्यंत रूपवान तेजस्वी जिसका मुख सूर्य से भी तेज चमक रहा था।
रुक्मणी सहसा ही उनके चरणों में गिर पड़ी...

ये क्या राधा जी के पुरे शरीर पर तो छाले पड़े हुए है !

रुक्मणी ने पूछा-
देवी आपके शरीर पे ये छाले कैसे ?

तब राधा जी ने कहा-
देवी !
कल आपने कृष्णजी को जो दूध दिया...
वो ज्यदा गरम था !

जिससे उनके ह्रदय पर छाले पड गए...
उनके ह्रदय में तो सदैव मेरा ही वास होता है..!!

इसलिए कहा जाता है-

बसना हो तो...
'ह्रदय' में बसो किसी के..!

'दिमाग' में तो..
लोग खुद ही बसा लेते है..!!

Monday, April 25, 2016

Rumi only breath

Rumi Guest House

Symbol of love

"कल तक मैं समझता था कि ताजमहल प्रेम की निशानी हैं ----
पर मैं ग़लत था
---प्रेम की निशानी तो रामसेतु हैं जो भगवान राम ने सीता को मिलने के लिये बनवाया था.....
🚩जय श्री राम🚩

Best Regards,

Sunday, April 24, 2016

Hindi Granth Karyalay

Begin forwarded message:

From: Manish Modi <>
Date: April 23, 2016 at 9:06:46 PM PDT
Subject: Please look at today's INDIAN EXPRESS Page 7 (24 April, 2016)

|| ॐ ह्रीं श्रीपार्श्वनाथाय नमः ||

|| Auṃ Hrīṃ ŚrīPārśvanāthāya Namaḥ ||

Jay Jinendra

Once Upon A Time: A publishing house thrives on a legacy of reform ushered in by its founder Publisher Pandit Nathuram Premi, friends with stalwarts like Mahavir Prasad Dwivedi and Premchand, was approached by Mahatma Gandhi to edit the Hindi version of Harijan

Manish Modi, owner of 100 year old hestoric shop Hindi Granth Karyalaya at C. P. Tank, Mumbai.  Express photo by   Ganesh ShirsekarManish Modi, the current owner of 100 year old historic shop Hindi Granth Karyalaya at C P Tank in Mumbai. (Express photo by Ganesh Shirsekar) - 

In January 1915, when Mohandas Karamchand Gandhi returned to India from South Africa and gave his first public speech in the ornate hall of Hira Baug in the CP Tank area of Girgaum, a young litterateur, reformist, linguist and publisher who ran his business from two rooms on the ground floor of Hira Baug was among those in the audience. In his early thirties then, Pandit Nathuram Premi had already established himself as a significant nationalist of the early 1900s in Bombay, having published the first Hindi translation of John Stuart Mill's On Liberty. Titled Svadheenata, it was a first from the publishing house, he had set up in 1912, called Hindi Granth Karyalay.

Now also a bookstore and treasure trove where readers can find the complete works of Chughtai, Manto, Tagore, Premchand as well as religious texts in a multitude of languages, translations of classical works and more, the publishing house continues to operate from the same location.

Seated in the room where Premi must have confabulated with historical writers and thinkers of that period, his great-grandson Manish Modi, 47, who now runs the business, has a little nugget of history tucked away — not only was Premi present at that historical Hira Baug address, but he would also be later approached by Gandhi to edit the Hindi version of Harijan.

"It is believed that Premiji recommended Mahavir Prasad Dwivedi for the job," Modi says. Dwivedi, a stalwart of Hindi literature and also editor of Sarasvati, a literary and reformist magazine followed closely by freedom fighters of that era, had collaborated with Premi — Svadheenata was his translation of Mill's tour de force.

Svadheenata more or less set the tone of the spirit that the publishing house continues to embody. Among those whose works were published by Premi were Munshi Premchand, Jainendra Kumar, Yashpal, Sharatchandra Chatterjee, Rabindranath Tagore, Hajariprasad Dwivedi and more.

Mahavir Prasad Dwivedi, Premchand and Premi were also close friends and the first edition of Premchand's Godaan was published by Hindi Granth Karyalay. "Premchand lived with our family for three months," says Modi, who learnt about his great-grandfather from his mother, who had come to Mumbai as a new bride, having studied till Class X, but was then encouraged by Premi to continue her studies. She would go on to complete her BA in Sanskrit. "Premiji was part of the intellectual revival of the time. Literature of great standard and reform were equally his focus," says Modi. "The books he published enshrined those ideals as much as he lived those ideals in his own life."

Premi came to Mumbai in the early 1900s, having found employment with a Jain trust at the Hira Baug dharmashala at CP Tank. Impressed with his work ethics, the owner of Hira Baug encouraged Premi to start his business from rooms in the building.

A Jain from Deori in Bundelkhand, Premi was a scholar of Jain philosophy and edited Jain Mitra and then Jain Hitaishi as he worked at the publishing house. His magazines were modelled on Sarasvati, the magazine edited by Dwivedi. A keen student of language, he also learnt and mastered Bengali, as well as Sanskrit, Gujarati, Marathi and Prakrit. Not only did he exhort readers of Jain Mitra to give up orthodoxy, he even got his own brother married to a widow. That progressive streak continues to define Hindi Granth Karyalay.

Modi, himself a scholar of Jainism and an aficionado of literature in languages ranging from Prakrit to Urdu, is also a linguist, translating from Prakrit, Sanskrit and Urdu into Hindi and English. Modi seeks out the best works in a set of niche subjects from publishers across the world and have these translated.

Premi, who had turned HindI Granth Karyalay into one of India's top three Hindi publishing houses along with Nirnaya Sagar and Khemraj Shrikrishnadas, left behind a legacy that Modi treasures. "And I will continue to nurture it as long as I can," he says.

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Saturday, April 23, 2016

राघव यादव

क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो रामायण की कथा पढ़ी जाए और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े
तो कृष्ण भागवत की कथा सुनाई दे।

जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ "राघवयादवीयम्" ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है।

इस ग्रन्थ को
'अनुलोम-विलोम काव्य' भी कहा जाता है। पूरे ग्रन्थ में केवल 30 श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधे
पढ़ते जाएँ, तो रामकथा बनती है और
विपरीत (उल्टा) क्रम में पढ़ने पर कृष्णकथा। इस प्रकार हैं तो केवल 30 श्लोक, लेकिन कृष्णकथा के भी 30 श्लोक जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं 60 श्लोक।

पुस्तक के नाम से भी यह प्रदर्शित होता है, राघव (राम) + यादव (कृष्ण) के चरित को बताने वाली गाथा है ~ "राघवयादवीयम।"

उदाहरण के तौर पर पुस्तक का पहला श्लोक हैः

वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥

मैं उन भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम करता हूं, जो
जिनके ह्रदय में सीताजी रहती है तथा जिन्होंने अपनी पत्नी सीता के लिए सहयाद्री की पहाड़ियों से होते हुए लंका जाकर रावण का वध किया तथा वनवास पूरा कर अयोध्या वापिस लौटे।


सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥

मैं रूक्मिणी तथा गोपियों के पूज्य भगवान श्रीकृष्ण के
चरणों में प्रणाम करता हूं, जो सदा ही मां लक्ष्मी के साथ
विराजमान है तथा जिनकी शोभा समस्त जवाहरातों की शोभा हर लेती है।

" राघवयादवीयम" के ये 60 संस्कृत श्लोक इस प्रकार हैं:-

राघवयादवीयम् रामस्तोत्राणि
वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥

सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥

साकेताख्या ज्यायामासीद्याविप्रादीप्तार्याधारा ।
पूराजीतादेवाद्याविश्वासाग्र्यासावाशारावा ॥ २॥

वाराशावासाग्र्या साश्वाविद्यावादेताजीरापूः ।
राधार्यप्ता दीप्राविद्यासीमायाज्याख्याताकेसा ॥ २॥

कामभारस्स्थलसारश्रीसौधासौघनवापिका ।
सारसारवपीनासरागाकारसुभूरुभूः ॥ ३॥

भूरिभूसुरकागारासनापीवरसारसा ।
कापिवानघसौधासौ श्रीरसालस्थभामका ॥ ३॥

रामधामसमानेनमागोरोधनमासताम् ।
नामहामक्षररसं ताराभास्तु न वेद या ॥ ४॥

यादवेनस्तुभारातासंररक्षमहामनाः ।
तां समानधरोगोमाननेमासमधामराः ॥ ४॥

यन् गाधेयो योगी रागी वैताने सौम्ये सौख्येसौ ।
तं ख्यातं शीतं स्फीतं भीमानामाश्रीहाता त्रातम् ॥ ५॥

तं त्राताहाश्रीमानामाभीतं स्फीत्तं शीतं ख्यातं ।
सौख्ये सौम्येसौ नेता वै गीरागीयो योधेगायन् ॥ ५॥

मारमं सुकुमाराभं रसाजापनृताश्रितं ।
काविरामदलापागोसमावामतरानते ॥ ६॥

तेन रातमवामास गोपालादमराविका ।
तं श्रितानृपजासारंभ रामाकुसुमं रमा ॥ ६॥

रामनामा सदा खेदभावे दया-वानतापीनतेजारिपावनते ।
कादिमोदासहातास्वभासारसा-मेसुगोरेणुकागात्रजे भूरुमे ॥ ७॥

मेरुभूजेत्रगाकाणुरेगोसुमे-सारसा भास्वताहासदामोदिका ।
तेन वा पारिजातेन पीता नवायादवे भादखेदासमानामरा ॥ ७॥

सारसासमधाताक्षिभूम्नाधामसु सीतया ।
साध्वसाविहरेमेक्षेम्यरमासुरसारहा ॥ ८॥

हारसारसुमारम्यक्षेमेरेहविसाध्वसा ।
यातसीसुमधाम्नाभूक्षिताधामससारसा ॥ ८॥

सागसाभरतायेभमाभातामन्युमत्तया ।
सात्रमध्यमयातापेपोतायाधिगतारसा ॥ ९॥

सारतागधियातापोपेतायामध्यमत्रसा ।
यात्तमन्युमताभामा भयेतारभसागसा ॥ ९॥

तानवादपकोमाभारामेकाननदाससा ।
यालतावृद्धसेवाकाकैकेयीमहदाहह ॥ १०॥

हहदाहमयीकेकैकावासेद्ध्वृतालया ।
सासदाननकामेराभामाकोपदवानता ॥ १०॥

वरमानदसत्यासह्रीतपित्रादरादहो ।
भास्वरस्थिरधीरोपहारोरावनगाम्यसौ ॥ ११॥

सौम्यगानवरारोहापरोधीरस्स्थिरस्वभाः ।
होदरादत्रापितह्रीसत्यासदनमारवा ॥ ११॥

यानयानघधीतादा रसायास्तनयादवे ।
सागताहिवियाताह्रीसतापानकिलोनभा ॥ १२॥

भानलोकिनपातासह्रीतायाविहितागसा ।
वेदयानस्तयासारदाताधीघनयानया ॥ १२॥

रागिराधुतिगर्वादारदाहोमहसाहह ।
यानगातभरद्वाजमायासीदमगाहिनः ॥ १३॥

नोहिगामदसीयामाजद्वारभतगानया ।
हह साहमहोदारदार्वागतिधुरागिरा ॥ १३॥

यातुराजिदभाभारं द्यां वमारुतगन्धगम् ।
सोगमारपदं यक्षतुंगाभोनघयात्रया ॥ १४॥

यात्रयाघनभोगातुं क्षयदं परमागसः ।
गन्धगंतरुमावद्यं रंभाभादजिरा तु या ॥ १४॥

दण्डकां प्रदमोराजाल्याहतामयकारिहा ।
ससमानवतानेनोभोग्याभोनतदासन ॥ १५॥

नसदातनभोग्याभो नोनेतावनमास सः ।
हारिकायमताहल्याजारामोदप्रकाण्डदम् ॥ १५॥

सोरमारदनज्ञानोवेदेराकण्ठकुंभजम् ।
तं द्रुसारपटोनागानानादोषविराधहा ॥ १६॥

हाधराविषदोनानागानाटोपरसाद्रुतम् ।
जम्भकुण्ठकरादेवेनोज्ञानदरमारसः ॥ १६॥

सागमाकरपाताहाकंकेनावनतोहिसः ।
न समानर्दमारामालंकाराजस्वसा रतम् ॥ १७॥

तं रसास्वजराकालंमारामार्दनमासन ।
सहितोनवनाकेकं हातापारकमागसा ॥ १७॥

तां स गोरमदोश्रीदो विग्रामसदरोतत ।
वैरमासपलाहारा विनासा रविवंशके ॥ १८॥

केशवं विरसानाविराहालापसमारवैः ।
ततरोदसमग्राविदोश्रीदोमरगोसताम् ॥ १८॥

गोद्युगोमस्वमायोभूदश्रीगखरसेनया ।
सहसाहवधारोविकलोराजदरातिहा ॥ १९॥

हातिरादजरालोकविरोधावहसाहस ।
यानसेरखगश्रीद भूयोमास्वमगोद्युगः ॥ १९॥

हतपापचयेहेयो लंकेशोयमसारधीः ।
राजिराविरतेरापोहाहाहंग्रहमारघः ॥ २०॥

घोरमाहग्रहंहाहापोरातेरविराजिराः ।
धीरसामयशोकेलं यो हेये च पपात ह ॥ २०॥

ताटकेयलवादेनोहारीहारिगिरासमः ।

हासहायजनासीतानाप्तेनादमनाभुवि ॥ २१॥

विभुनामदनाप्तेनातासीनाजयहासहा ।
ससरागिरिहारीहानोदेवालयकेटता ॥ २१॥

भारमाकुदशाकेनाशराधीकुहकेनहा ।
चारुधीवनपालोक्या वैदेहीमहिताहृता ॥ २२॥

ताहृताहिमहीदेव्यैक्यालोपानवधीरुचा ।
हानकेहकुधीराशानाकेशादकुमारभाः ॥ २२॥

हारितोयदभोरामावियोगेनघवायुजः ।
तंरुमामहितोपेतामोदोसारज्ञरामयः ॥ २३॥

योमराज्ञरसादोमोतापेतोहिममारुतम् ।
जोयुवाघनगेयोविमाराभोदयतोरिहा ॥ २३॥

भानुभानुतभावामासदामोदपरोहतं ।
तंहतामरसाभक्षोतिराताकृतवासविम् ॥ २४॥

विंसवातकृतारातिक्षोभासारमताहतं ।
तं हरोपदमोदासमावाभातनुभानुभाः ॥ २४॥

हंसजारुद्धबलजापरोदारसुभाजिनि ।
राजिरावणरक्षोरविघातायरमारयम् ॥ २५॥

यं रमारयताघाविरक्षोरणवराजिरा ।
निजभासुरदारोपजालबद्धरुजासहम् ॥ २५॥

सागरातिगमाभातिनाकेशोसुरमासहः ।
तंसमारुतजंगोप्ताभादासाद्यगतोगजम् ॥ २६॥

जंगतोगद्यसादाभाप्तागोजंतरुमासतं ।
हस्समारसुशोकेनातिभामागतिरागसा ॥ २६॥

वीरवानरसेनस्य त्राताभादवता हि सः ।
तोयधावरिगोयादस्ययतोनवसेतुना ॥ २७॥

नातुसेवनतोयस्यदयागोरिवधायतः ।
सहितावदभातात्रास्यनसेरनवारवी ॥ २७॥

हारिसाहसलंकेनासुभेदीमहितोहिसः ।
चारुभूतनुजोरामोरमाराधयदार्तिहा ॥ २८॥

हार्तिदायधरामारमोराजोनुतभूरुचा ।
सहितोहिमदीभेसुनाकेलंसहसारिहा ॥ २८॥

नालिकेरसुभाकारागारासौसुरसापिका ।
रावणारिक्षमेरापूराभेजे हि ननामुना ॥ २९॥

नामुनानहिजेभेरापूरामेक्षरिणावरा ।
कापिसारसुसौरागाराकाभासुरकेलिना ॥ २९॥

साग्र्यतामरसागारामक्षामाघनभारगौः ॥
निजदेपरजित्यास श्रीरामे सुगराजभा ॥ ३०॥

भाजरागसुमेराश्रीसत्याजिरपदेजनि ।स
गौरभानघमाक्षामरागासारमताग्र्यसा ॥ ३०॥

॥ इति श्रीवेङ्कटाध्वरि कृतं श्री ।।

कृपया अपना थोड़ा सा कीमती वक्त निकाले और उपरोक्त श्लोको को गौर से अवलोकन करें की दुनिया में कहीं भी ऐसा नही पाया गया ग्रंथ है ।

शत् शत् प्रणाम ऐसे रचनाकार को 🙏

Indian currency system

Phootie Cowrie to Cowrie
Cowrie to Damri
Damri to Dhela
Dhela to Pie
Pie to to Paisa
Paisa to Rupya
256 Damri = 192 Pie = 128 Dhela = 64 Paisa (old) = 16 Anna = 1 Rupya

Now u know how some of the indian sayings originated..
ek 'phooti cowrie' nahin doonga...
'dhele' ka kaam nahin karti hamari bahu...
chamdi jaye par 'damdi' na jaye...
'pie pie' ka hisaab rakhna...

Thursday, April 21, 2016


🚩हनुमानजी जयंती 22 अप्रैल 2016

🚩#हनुमानजी भगवान #शिवजी के 11वें रुद्रावतार, सबसे बलवान और बुद्धिमान हैं ।

🚩#ज्योतिषियों की #गणना अनुसार हनुमान जी का जन्म 1 #करोड़ 85 लाख 58 हजार 112 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्र नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6:03 बजे हुआ था ।

🚩#हनुमानजी के पिता सुमेरू पर्वत के #वानरराज राजा #केसरी थे तथा माता #अंजना थी । हनुमान जी को #पवनपुत्र के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि पवन देवता ने हनुमानजी को पालने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।

🚩हनुमानजी को #बजरंगबली के रूप में जाना जाता है क्योंकि हनुमानजी का शरीर वज्र की तरह था ।

🚩पृथ्वी पर सात मनीषियों को अमरत्व (चिरंजीवी) का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं । हनुमानजी आज भी #पृथ्वी पर विचरण करते है ।

🚩हनुमानजी को एक दिन अंजनी माता फल लाने के लिये आश्रम में छोड़कर चली गईं । जब शिशु हनुमानजी को भूख लगी तो वे उगते हुये सूर्य को फल समझकर उसे पकड़ने आकाश में उड़ने लगे । उनकी सहायता के लिये पवन भी बहुत तेजी से चला। उधर भगवान सूर्य ने उन्हें अबोध शिशु समझकर अपने तेज से नहीं जलने दिया । जिस समय हनुमान जी सूर्य को पकड़ने के लिये लपके, उसी समय राहु #सूर्य पर ग्रहण लगाना चाहता था । हनुमानजी ने सूर्य के ऊपरी भाग में जब राहु का स्पर्श किया तो वह भयभीत होकर वहाँ से भाग गया । उसने इन्द्र के पास जाकर शिकायत की "देवराज! आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे । आज अमावस्या के दिन जब मैं सूर्य को ग्रस्त करने गया तब देखा कि दूसरा राहु सूर्य को पकड़ने जा रहा है ।"

🚩राहु की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और उसे साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े । राहु को देखकर हनुमानजी सूर्य को छोड़ राहु पर झपटे । राहु ने इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा तो उन्होंने हनुमानजी पर वज्र से प्रहार किया जिससे वे एक पर्वत पर गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई ।

🚩हनुमान की यह दशा देखकर #वायुदेव को क्रोध आया । उन्होंने उसी क्षण अपनी गति रोक दी । जिससे संसार का कोई भी #प्राणी साँस न ले सका और सब पीड़ा से तड़पने लगे । तब सारे #सुर, #असुर, यक्ष, किन्नर आदि #ब्रह्मा जी की शरण में गये । #ब्रह्मा उन सबको लेकर वायुदेव के पास गये । वे मूर्छित हनुमान जी को गोद में लिये उदास बैठे थे । जब ब्रह्माजी ने उन्हें जीवित किया तो वायुदेव ने अपनी गति का संचार करके सभी प्राणियों की पीड़ा दूर की । फिर ब्रह्माजी ने कहा कि कोई भी #शस्त्र इसके अंग को हानि नहीं कर सकता । #इन्द्र ने भी वरदान दिया कि इनका शरीर #वज्र से भी कठोर होगा । सूर्यदेव ने कहा कि वे उसे अपने तेज का शतांश प्रदान करेंगे तथा शास्त्र मर्मज्ञ होने का भी आशीर्वाद दिया। वरुण ने कहा क़ि मेरे पाश और जल से यह #बालक सदा सुरक्षित रहेगा । यमदेव ने अवध्य और निरोग रहने का आशीर्वाद दिया । #यक्षराज कुबेर, #विश्वकर्मा आदि देवों ने भी अमोघ वरदान दिये ।

🚩इन्द्र के वज्र से हनुमानजी की ठुड्डी (संस्कृत मे हनु) टूट गई थी । इसलिये उनको "हनुमान"नाम दिया गया । इसके अलावा ये अनेक नामों से प्रसिद्ध है जैसे #बजरंग बली, #मारुति, #अंजनि सुत, #पवनपुत्र, #संकटमोचन, #केसरीनन्दन, #महावीर, #कपीश, #बालाजी महाराज आदि ।

🚩हनुमानजी के #पराक्रम अवर्णनीय है । आज के आधुनिक युग के कुछ दुष्ट लोग हनुमानजी को बन्दर कहने वाले पहले अपनी बुद्धि का इलाज करावो । हमुमानजी शिवजी का अवतार है । भगवान श्री राम के कार्य में साथ देने (राक्षसों का नाश)के लिए हनुमानजी ने अवतार धारण किया था ।

🚩मनोजवं मारुततुल्य वेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथ मुख्य, श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ।

🚩जिसको घर में कलह, क्लेश मिटाना हो, रोग या शारीरिक दुर्बलता मिटानी हो, वह नीचे की चौपाई की पुनरावृत्ति किया करे..
🚩बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन - कुमार |
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ||

Valmiki Ramayan

Saturday, April 16, 2016


"🐄Cow is just an animal like a hen or goat... then why is it revered and why one should not kill and eat it?"

🐄Cow is also an animal, but... a cow has many specialities that no other animal (not even human beings) has in this world.

This is the reason that Hindus consider cow as 'mother' after their own mother, and pray to the cow with respect calling it "go-matha".

These are some truths about go-matha.🐄

·🐄 If a cow eats something poisonous by mistake, and we drink its milk, will we fall ill? To find out, one cow was regularly fed a particular quantity of a poison every day.

After 24 hours, its blood, urine, dung and milk were tested in a lab to check where the poison could be found. In this way, the tests were done not for 1 or 2 days, but continuously for 90 days in All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) New Delhi. The researcher did not find any trace of poison in milk, blood, urine or dung of that cow.🐄

Then where did this poison fed for 90 days go? Just like Lord Shiva held poison in his throat, the go-matha hid the entire poison in her throat. This is a special quality that no other animal has.🐄

·🐄 This is the only creature that inhales oxygen and also exhales oxygen.

·🐄 Cow milk has the quality of countering poison.

· There are diseases that medical science has not yet understood; urine of Go-matha has the power to cure them.🐄

·🐄 If cow-ghee and rice are cooked together, two powerful gases called ethylene-oxide, propylene-oxide are released. Propylene-oxide is the best gas used for creating artificial rain.

·🐄 Cow-urine is the world's best killer of microbes

· 🐄With medicines made using cow dung and cow urine, stomach-related ailments can be cured.

·🐄 We can save ourselves from radio-waves by plastering the home floors and area outside home with cow-dung.

·🐄 Cow-dung has the power to destroy the microbes causing cholera.

· If 10 grams of cow-ghee is put in fire (yagnya), 1 ton of oxygen is generated.🐄

If you feel it useful, pls share it with your contacts...🐄

Thursday, April 14, 2016

8 of 9 done

Fw: Navratras celebrations starts TODAY!

All is well and 3/4th is ocean. A picture may be worth a thousand words. But mere words can inspire millions.

----- Forwarded Message -----
Sent: Thursday, April 7, 2016 5:04 PM
Subject: Navratras celebrations starts TODAY!

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Fw: Asthami Kanya Puja & Ram Nanami tonight - Sitaram Kalyanam Friday


----- Forwarded Message -----
Sent: Thursday, April 14, 2016 8:04 AM
Subject: Asthami Kanya Puja & Ram Nanami tonight - Sitaram Kalyanam Friday

Durga Astami: Always sunrise time taken, best when combined with Navami. Navami Fast is observed when Astami prevails with Navami. Kent - USA, astami ends on April 14th at 8:59 AM and Navami starts. Hence navami fast and puja has to be done on April 14th along with Astami. But Navami Balidan has to be done when Navami prevails during sunrise which is April 15th. Those who keep Navami fast has to be observed on April 14th and fast will break at 9:34 AM after offering naivadhya to Maa Durga.
Jai Mata Di

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Wednesday, April 13, 2016

7 of 9 done


This is the Temple of Lord Nishkalangeswar located about 1KM inside the Arabian Sea, near Bhavnagar, Gujarat.

Everyday, the sea withdraws to allow pilgrims to have darshan of Lord Shiva between 1pm & 10pm.

It seems Pandavas worshipped this Sthala & in their memory 5 Shivalings have been installed.

The Stone Temple Flag (Kodimaram pr Dwajasthambham) is about 20 feet height which has remained undamaged in floods or hurricanes so far. Upto 1 PM everyday, the sea water level touches the top of this Stone Temple Flag.

After 1pm, sea level starts reducing on both sides & allows people to go & worship Lord Shiva! This is the speciality of this wonderful Temple, probably the only one of its kind in the whole world 🙏🙏🙏

Tuesday, April 12, 2016

Hanuman Chalisa and Gayatri Mantra

Hanuman Chalisa and Gayatri Mantra

Any one who knows the Hanuman Chalisa? In Hanuman Chalisa, it is said :

"Yug sahastra yojan per Bhanu!
Leelyo taahi madhur phal janu!!

1 Yug = 12000 years
1 Sahastra = 1000

1 Yojan = 8 Miles

Yug x Sahastra x Yojan = par Bhanu
12000 x 1000 x 8 miles = 96000000 miles

1 mile = 1.6kms

96000000 miles = 96000000 x 1.6kms =
96000000 miles=1536000000 kms to Sun

NASA has said that, it is the exact distance between Earth and Sun (Bhanu).
Which proves God Hanuman did jump to Planet Sun, thinking it as a sweet fruit (Madhur phal).

It is really interesting how accurate and meaningful our ancient scriptures are.Unfortunately barely it is recognized, interpreted accurately or realized by any in today's time...

The GAYATRI MANTRA" the most powerful hymn in the world

Dr.Howard Steingeril, an American scientist, collected Mantras, Hymns and invocations from all over the world and tested for their strength in his Physiology Laboratory&

Hindu's Gayatri Mantra produced 110,000 sound waves /second...

This was the highest and was found to be the most powerful hymn in the world.
Through the combination of sound or sound waves of a particular frequency, this Mantra is claimed to be capable of developing specific spiritual potentialities.
The Hamburg university initiated research in
to the efficacy of the Gayatri Mantra both on the mental and physical plane of CREATION...

The GAYATRI MANTRA is broadcasted daily for 15 minutes from 7 P.M. onwards over Radio Paramaribo, Surinam, South America for the past two years, and in Amsterdam, Holland for the last six months.

Daily dose